Wednesday, 10 May 2017

और बुद्ध का घर छोड़ना.....


बुद्ध के बारे में यह भ्रंति फैली हुई है की बुद्ध शव को देख दुखो से घबरा के अपनी पत्नी और पुत्र को छोड़ के घर से भाग( घर छोड़ दिया) गए थे , पर यह केवल भ्रंति है और  इसमें सच्चाई नहीं ।

बुद्ध का नाम सिद्धार्थ था और वे शाक्य जनजाति से थे , उनके पिता शाक्य गणराज्य के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके थे । शाक्य गणराज में शाक्यों का अपना एक संघ था और राज्य के सभी फैंसले यह संघ ही करता था । संघ का नियम था की गण राज्य के प्रत्येक युवक को 20 साल का होने पर संघ का सदस्य बनना पड़ता था  । अत: सिद्धार्थ को भी 20 साल का होने पर सदस्य बनाया गया । सिद्दार्थ 8 साल तक संघ के सक्रीय सदस्य रहें ।
शाक्य गणराज के पूर्व में कौलिय गणराज्य था और रोहिणी नदी दोनों राज्यो की विभाजक रेखा थी , अक्सर नदी के पानी को लेके दोनों राज्यो में झड़प होती रहती थी ।

परन्तु एक बार पानी को लेके शाक्यों और कोलिय किसनो में गंभीर झड़प हुई , बात युद्ध तक अ पहुची । शाक्य सेनापति ने कौलियो के विरुद्ध युद्ध छेड़ने के लिए संघ की अनुमति प्राप्त करने के लिए सभा बुलाई । सभा में युद्ध करने का प्रस्ताव पारित हो गया , अंत में सेनापति ने सभी सदस्यों से एक बार फिर पूछा की युद्ध से किसी को आपत्ति तो नहीं है ?
इस पर सिद्धार्थ ने खड़े होके युद्ध पर आपत्ति करते हुए कहा की यह मामला बैठ के भी सुलझाया जा सकता है , युद्ध से युद्ध के बीज बो उठते है और स्थाई हल नहीं निकलता । सिद्धार्थ ने कहा कीकौलिय हमारे पडोसी है और झगडे का सही कारण पता कर उसका निवारण किया जाए इसके लिए  पांच सदस्यों की एक कमेटी बनाई जाये जो दोनों पक्षो के मसलो को शांति पूर्वक हल करे।
इस तरह सिद्धार्थ के विरोध करने पर सभा अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दी गई ।
अगले दिन सेनापति ने अनिवार्य सैनिक भर्ती का प्रस्ताव रखा , सिद्धार्थ ने उसका विरोध किया और कहा की न वे अनिवार्य सैनिक बनेंगे और न ही युद्ध में भाग लेंगे ।

इस पर संघ ने सिद्धार्थ पर तीन दण्डो का प्रवधान रखा
1- फांसी
2- देश निकाला परिव्राजकके रूप में
3- परिवार के लोगो का सामाजिक बहिस्कार तथा सम्पति जब्त

तब सिद्धार्थ ने संघ से प्रार्थना की कि कृपया परिवार का सामजिक बहिस्कार न करें और न ही उनकी सम्पति छीने , अपराधी मैं हूँ इसलिए चाहे मुझे देश निकाला दे दें या फांसी पर चढ़ा दें ।
उनकी इस बात पर संघ में काफी विचार विमर्श हुआ , अत: यह निर्णय लिया गया की सिद्धार्थ को  परिव्राजक के रूप में देश निकाला दे दिया जाए ।
घर आके सिद्धार्थ ने यह बात अपने परिवार वालो को बताइये तो वे बहुत दुखी हुए,पत्नी यशोधरा साथ आना चाहती थी पर सिद्धार्थ ने समझाया की यह संघ की निति के विरुद्ध है और उन्हें अकेले ही देश छोड़ना होगा । अंत में सिद्धार्थ अपनी पत्नी और परिवार वालो को समझाने में सफल हो जाते हैं ।

उसके बाद कपिलवस्तु में उनका प्रब्रज्य संस्कार के बाद सिद्धार्थ ने अपनी यात्रा आरम्भ की और अनोमा नदी की ओर चल पड़े।और वंहा से शुरू हुआ सिद्धार्थ के बुद्ध बनने सफर।
अपने पिता की मृत्यु पर बुद्ध कपिलवस्तु वापस लौटे , उसके बाद उनकी माता और पत्नी यशोधरा भी बौद्ध संघ में शामिल हुईं और भिक्षुणी बनी। थेरी गाथाओं में लगभग 75भिक्षुणीयो का उल्लेख है जिसमें यशोधरा और बुद्ध की माता का नाम है ।

No comments:

Post a Comment